बचपन की उँगलियों से मोड़ा गया काग़ज़,
जिसमें छुपी थी दुनिया भर की खुशी।
वो घर छोटा था, नाज़ुक था,
पर उसमें सपनों की छत ऊँची थी।
आज पक्के मकान हैं,
पर दिल अब भी उसी
काग़ज़ के घर में रहता है।” ❤️
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विस्तृत ब्लॉग आज के समय में सामाजिक समस्याएँ केवल समाज की संरचना को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर...
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