गायघाट की CO शिवांगी पाठक ने किया सम्मानित संवाद


 Padma Awards 2025
भारत सरकार द्वारा Padma Awards 2025 के अंतर्गत बिहार की लोककला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली निर्मला देवी को पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है। यह सम्मान वर्षों की साधना, मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
इस अवसर पर गायघाट की अंचल अधिकारी (CO) शिवांगी पाठक ने निर्मला देवी से संवाद किया। बातचीत के दौरान निर्मला देवी ने अपनी कला-यात्रा, संघर्ष और परंपरागत लोककला को जीवित रखने के अनुभव साझा किए।

CO शिवांगी पाठक ने कहा कि निर्मला देवी जैसी कलाकार न सिर्फ़ बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कला हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का काम कर रही है।

घर के छोटे से कमरे में शुरू हुई यह कला-यात्रा आज राष्ट्रीय मंच तक पहुँची है। निर्मला देवी का पद्मश्री सम्मान यह संदेश देता है कि ग्रामीण कला और साधारण जीवन से भी असाधारण इतिहास रचा जा सकता है।

77वें गणतंत्र दिवस 2026 : - यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का कहना है कि एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर बनाता है।

भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले 
समारोह में मुख्य अतिथि होना मेरे लिए जीवन भर 
का सम्मान है।'

सोमवार को नई दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह 
के अवसर पर कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वजारोहण के दौरान
 यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो 
मुख्य अतिथि थीं, का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वागत किया गया।


भारत ने सोमवार (26 जनवरी, 2026) को अपने 77वें गणतंत्र
दिवस का भव्य प्रदर्शन किया, जिसमें मिसाइलें, युद्धक विमान, 
नवगठित सैन्य इकाइयाँ और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल
की गई घातक हथियार प्रणालियाँ शामिल थीं। यूरोपीय परिषद के 
अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन 
डेर लेयेन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई।

भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले यूरोपीय संघ के 
अध्यक्ष ने कहा,'गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होना मेरे लिए
 जीवन भर का सम्मान है।'

लालू यादव की राजनीतिक पारी का अंत, अब तेजस्वी यादव संभालेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तेजस्वी यादव को अपना राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ, लालू यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद पार्टी में 'लालू युग' का आधिकारिक तौर पर समापन हो गया है। अब Tejashwi Yadav ही राजद के सर्वोच्च नेता होंगे, जो बिहार की इस प्रमुख पार्टी में एक नए नेतृत्व और युग की शुरुआत का प्रतीक है।

हाईलाइट्स

•तेजस्वी यादव बने राजद के कार्यकारी अध्यक्ष ।

•लालू यादव के राजनीतिक युग का आधिकारिक अंत।

•अब तेजस्वी यादव संभालेंगे पार्टी की कमान।

MantoshTalks Muzaffarpur| बिहार की प्रमुख पार्टियों में से एक राष्ट्रीय जनता दल में आज एक नए युग की शुरुआत हो गई है। पार्टी ने तेजस्वी यादव को RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया है।

RJD में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद पहले लालू यादव के पास था। वह 1997 में पार्टी की स्थापना के बाद से ही ये पद संभाल रहे थे। राजद के इस फैसले के बाद पार्टी में 'लालू युग' का ऑफिशियल अंत हो गया है। अब Tejashwi Yadav ही पार्टी के हाईकमान होंगे।

पार्टी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट किया, "एक नए युग की शुरुआत ! तेजस्वी यादव जी को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।"

यह घोषणा RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन सत्र में की गई, जिसमें लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री शामिल थे। लालू यादव ने अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में अपने बेटे तेजस्वी यादव को नियुक्ति पत्र सौंपा।

आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने बताया, "राष्ट्रीय अध्यक्ष की मंजूरी के बाद, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था। पूरी कमेटी ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और आज से तेजस्वी जी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे।"

नेता प्रतिपक्ष के पद पर भी तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के छोटे बेटे हैं और बिहार के उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। फिलहाल वह बिहार विधासभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाल रहे हैं।

हाल ही में संपन्न हुआ का विधानसभा चुनाव राजद ने तेजस्वी यादव के चेहरे पर लड़ा था, लेकिन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद से ही पार्टी में लगातार मंथन चल रहा था। अब तेजस्वी यादव ने पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है।

Bihar Pre Primary School :बिहार के आंगनबाड़ी केंद्र अब बनेंगे प्री-प्राइमरी स्कूल, हर दिन सुबह में होगी प्रार्थना और योग

बिहार में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के सभी 1 लाख 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।


Bihar Pre Primary School: बिहार में प्रारंभिक

शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सभी 1 लाख 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को अब प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में समाज कल्याण विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर एलान किया गया है। इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चों को प्रारंभसे ही शिक्षा से जोड़ना और पोषण के साथ गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई उपलब्ध कराना है।

समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में राज्य के लगभग 8400 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी एजुकेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से करीब 28 लाख से अधिक बच्चों को एक साथ पढ़ाई और पोषाहार की सुविधा मिलेगी। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।

विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना की शुरुआत अगले वित्तीय वर्ष से कर दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों को सिर्फ पोषाहार ही नहीं, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा भी एक स्कूल की तरह मिले। जब बच्चे छोटी उम्र से ही पढ़ाई के माहौल में रहेंगे, तो अ उनकी स्कूल में निरंतरता भी बनी रहेगी।

योजना के तहत जिन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा, उन सभी केंद्रों को एक ही रंग-रूप में तैयार किया जाएगा। इससे न सिर्फ केंद्रों की पहचान एक जैसी होगी, बल्कि बच्चों को भी स्कूल जैसा वातावरण महसूस होगा। इसके साथ ही बच्चों के खेलने के लिए अलग से जगह चिन्हित की जाएगी और खेल-कूद का समय भी निर्धारित किया जाएगा, ताकि पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा सके।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के लिए एक समान पोशाक की भी व्यवस्था की जाएगी। यह पोशाक जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार कराई जाएगी और सभी बच्चों को एक जैसी ड्रेस पहनकर केंद्र पर आना होगा। इससे बच्चों में समानता की भावना विकसित होगी, जैसा अनुशासन भी बनेगा।

इसके अलावा समाज कल्याण विभाग की ओर से बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस किट में प्री-प्राइमरी स्तर की पूरी शैक्षणिक सामग्री मुफ्त दी जाएगी, ताकि बच्चों को पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी न हो। किताबें, कॉपी, रंग, पेंसिल जैसी जरूरी सामग्री इस किट में शामिल होंगी।

जब आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह प्री-प्राइमरी ग्रुप में विकसित हो जाएंगे, तब यहां बच्चों की दिनचर्या भी स्कूल की तरह तय होगी। प्रतिदिन सुबह बच्चों के लिए योग, प्रार्थना और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इससे बच्चों में अनुशासन, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का विकास होगा।

समाज कल्याण विभाग का मानना है कि इस योजना के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों का भरोसा और मजबूत होगा। विभाग का लक्ष्य है कि अभिभावक यह समझें कि आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषाहार का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाला शिक्षण केंद्र बन चुका है, जहां पढ़ाई और पोषण दोनों एक साथ मिलेंगे।


मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड की 19 पंचायत बने गृह-मुक्त प्रसव का माडल


मुजफ्फरपुर जिले का गायघाट प्रखंड गृह-मुक्त प्रसव का एक सफल माडल बन गया है। यहां सभी 19 पंचायतों में गृह प्रसव दर 40 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत पर आ गई है। इस सफलता को देखते हुए, इस माडल को जिले के अन्य प्रखंडों में भी लागू करने की तैयारी है। संस्थागत प्रसव दर 95 प्रतिशत से अधिक होने के कारण मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।

MantoshTalks मुजफ्फरपुर । जिले का गायघाट प्रखंड गृह-मुक्त प्रसव का सफल माडल बन गया है। यहां के सभी 19 पंचायतों में गृह प्रसव दर, जो पहले 40 प्रतिशत से अधिक थी, घटकर मात्र 2 प्रतिशत पर आ गई है।

इस उपलब्धि को देखते हुए अब इस माडल को जिले के अन्य प्रखंडों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है। पीएचसी प्रभारी, आशा तथा एएनएम को इस माडल को अपनाने और बेहतर तरीके से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ ने बताया कि गायघाट प्रखंड के 19 पंचायत पूरी तरह से गृह-मुक्त प्रसव पंचायत के रूप में शामिल कर लिया गया है।

यहां संस्थागत प्रसव दर 95 प्रतिशत से 3 पहुंच चुकी है, जिसके कारण मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। लक्ष्य है कि इसी माडल को शेष पंचायतों और अन्य प्रखंडों में भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि हर गर्भवती महिला को सुरक्षित और सम्मानजनक प्रसव का अवसर मिल सके।
एएनएम और सीएचओ के कार्यों की सघन निगरानी की गई। सभी एएनसी विजिट की शत-प्रतिशत ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई।

फ्रंटलाइन वर्करों ने प्रसूताओं के साथ लगातार फोन पर संपर्क बनाए रखा, जिससे उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका। गायघाट के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि प्रसूताओं को समय पर अस्पताल लाने के लिए परिवहन संबंधी भय को दूर किया गया। एम्बुलेंस सेवाओं को 24 घंटे सातों दिन उपलब्ध और जवाबदेह बनाया गया, जिससे बड़ा बदलाव देखने को मिला।

= इस रणनीति से मिली सफलता

  24 घंटे एम्बुलेंस उपलब्धता सुनिश्चित

•  परिवहन संबंधी डर दूर करने के लिए जवाबदेह एम्बुलेंस सेवा

 • आशा, पर्यवेक्षक, पीएचसी प्रभारी और प्रसव कक्ष प्रभारी के बीच बेहतर समन्वय

•  संभावित प्रसव तिथि से पहले आशा का परिवार से नियमित संपर्क

  अस्पताल में प्रसव के दौरान प्रसूता को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसकी सतत निगरानी

गायघाट की CO शिवांगी पाठक ने किया सम्मानित संवाद

  Padma Awards 2025 भारत सरकार द्वारा Padma Awards 2025 के अंतर्गत बिहार की लोककला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली निर्मला देवी ...