ज़मीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
प्रस्तावना
गायघाट प्रखंड के किसान इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। खेत तैयार हैं, बीज बोने का समय आ चुका है, लेकिन सबसे ज़रूरी चीज़—खाद (यूरिया, डीएपी, पोटाश)—उन्हें समय पर नहीं मिल पा रही। सवाल यह है कि जब सरकार हर साल पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने का दावा करती है, तो गायघाट में किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रही?
1️⃣ खाद की मांग ज़्यादा, आपूर्ति कम
खरीफ और रबी सीजन के समय गायघाट में खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है।
लेकिन स्थानीय सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर:
सीमित मात्रा में खाद पहुँचती है
समय पर स्टॉक नहीं आता
किसानों की संख्या के अनुसार वितरण नहीं होता
👉 नतीजा: किसान लाइन में लगते हैं, लेकिन हाथ खाली लौटते हैं।
2️⃣ कालाबाज़ारी और जमाखोरी
स्थानीय किसानों का आरोप है कि:
खाद को ब्लैक में बेचा जा रहा है
एक बोरी की कीमत तय रेट से ₹300–₹500 ज़्यादा ली जा रही है
छोटे किसानों को खाद नहीं मिलती, बड़े किसानों को पहले
📌 प्रशासनिक निगरानी की कमी यहाँ साफ दिखती है।
3️⃣ ऑनलाइन पंजीकरण की समस्या
सरकार ने खाद वितरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है, लेकिन:
कई किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं
इंटरनेट की समस्या
तकनीकी जानकारी का अभाव
👉 इसका सीधा असर बुज़ुर्ग और गरीब किसानों पर पड़ रहा है।
4️⃣ समय पर मॉनिटरिंग का अभाव
कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा:
समय-समय पर दुकानों की जांच नहीं
स्टॉक की सही रिपोर्टिंग नहीं
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं
❗ यही वजह है कि समस्या हर साल दोहराई जाती है।
5️⃣ किसान क्या कहते हैं? (ज़मीनी आवाज़)
“खेत तैयार है, पैसा भी है, लेकिन खाद नहीं मिल रहा।”
“सरकारी रेट पर खाद सिर्फ कागज़ में है।”
“लाइन में खड़े रहो, फिर भी खाद नहीं।”
ये आवाज़ें गायघाट के कई गांवों से लगातार सामने आ रही हैं।
6️⃣ सरकार के दावे और हकीकत
सरकारी आंकड़ों में:
खाद की कोई कमी नहीं
वितरण सुचारू बताया जाता है
लेकिन ज़मीनी सच्चाई:
किसान परेशान
फसल लेट
लागत बढ़ रही है
समाधान क्या हो सकता है?
✔ खाद की आपूर्ति समय से पहले सुनिश्चित की जाए
✔ कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई
✔ ऑफलाइन विकल्प भी उपलब्ध हों
✔ स्थानीय स्तर पर पारदर्शी वितरण सूची
✔ किसानों की शिकायत के लिए हेल्पलाइन
निष्कर्ष
गायघाट में खाद संकट सिर्फ सप्लाई का नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी का भी सवाल है। जब तक ज़मीनी हकीकत को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक किसान इसी तरह परेशान होते रहेंगे।
✍️ आपका क्या कहना है?
क्या आपके गांव में भी खाद की समस्या है?
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