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गायघाट की CO शिवांगी पाठक ने किया सम्मानित संवाद


 Padma Awards 2025
भारत सरकार द्वारा Padma Awards 2025 के अंतर्गत बिहार की लोककला को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली निर्मला देवी को पद्मश्री सम्मान से नवाज़ा गया है। यह सम्मान वर्षों की साधना, मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
इस अवसर पर गायघाट की अंचल अधिकारी (CO) शिवांगी पाठक ने निर्मला देवी से संवाद किया। बातचीत के दौरान निर्मला देवी ने अपनी कला-यात्रा, संघर्ष और परंपरागत लोककला को जीवित रखने के अनुभव साझा किए।

CO शिवांगी पाठक ने कहा कि निर्मला देवी जैसी कलाकार न सिर्फ़ बिहार, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। उनकी कला हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का काम कर रही है।

घर के छोटे से कमरे में शुरू हुई यह कला-यात्रा आज राष्ट्रीय मंच तक पहुँची है। निर्मला देवी का पद्मश्री सम्मान यह संदेश देता है कि ग्रामीण कला और साधारण जीवन से भी असाधारण इतिहास रचा जा सकता है।

77वें गणतंत्र दिवस 2026 : - यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन का कहना है कि एक सफल भारत दुनिया को अधिक स्थिर बनाता है।

भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले 
समारोह में मुख्य अतिथि होना मेरे लिए जीवन भर 
का सम्मान है।'

सोमवार को नई दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह 
के अवसर पर कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वजारोहण के दौरान
 यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, जो 
मुख्य अतिथि थीं, का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वागत किया गया।


भारत ने सोमवार (26 जनवरी, 2026) को अपने 77वें गणतंत्र
दिवस का भव्य प्रदर्शन किया, जिसमें मिसाइलें, युद्धक विमान, 
नवगठित सैन्य इकाइयाँ और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल
की गई घातक हथियार प्रणालियाँ शामिल थीं। यूरोपीय परिषद के 
अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन 
डेर लेयेन ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह की शोभा बढ़ाई।

भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन से एक दिन पहले यूरोपीय संघ के 
अध्यक्ष ने कहा,'गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होना मेरे लिए
 जीवन भर का सम्मान है।'

लालू यादव की राजनीतिक पारी का अंत, अब तेजस्वी यादव संभालेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने तेजस्वी यादव को अपना राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ, लालू यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद पार्टी में 'लालू युग' का आधिकारिक तौर पर समापन हो गया है। अब Tejashwi Yadav ही राजद के सर्वोच्च नेता होंगे, जो बिहार की इस प्रमुख पार्टी में एक नए नेतृत्व और युग की शुरुआत का प्रतीक है।

हाईलाइट्स

•तेजस्वी यादव बने राजद के कार्यकारी अध्यक्ष ।

•लालू यादव के राजनीतिक युग का आधिकारिक अंत।

•अब तेजस्वी यादव संभालेंगे पार्टी की कमान।

MantoshTalks Muzaffarpur| बिहार की प्रमुख पार्टियों में से एक राष्ट्रीय जनता दल में आज एक नए युग की शुरुआत हो गई है। पार्टी ने तेजस्वी यादव को RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुन लिया है।

RJD में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद पहले लालू यादव के पास था। वह 1997 में पार्टी की स्थापना के बाद से ही ये पद संभाल रहे थे। राजद के इस फैसले के बाद पार्टी में 'लालू युग' का ऑफिशियल अंत हो गया है। अब Tejashwi Yadav ही पार्टी के हाईकमान होंगे।

पार्टी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट किया, "एक नए युग की शुरुआत ! तेजस्वी यादव जी को राष्ट्रीय जनता दल का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।"

यह घोषणा RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के उद्घाटन सत्र में की गई, जिसमें लालू यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी, दोनों बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री शामिल थे। लालू यादव ने अन्य शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में अपने बेटे तेजस्वी यादव को नियुक्ति पत्र सौंपा।

आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने बताया, "राष्ट्रीय अध्यक्ष की मंजूरी के बाद, विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा गया था। पूरी कमेटी ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और आज से तेजस्वी जी पार्टी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर काम करेंगे।"

नेता प्रतिपक्ष के पद पर भी तेजस्वी यादव

तेजस्वी यादव पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के छोटे बेटे हैं और बिहार के उप मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। फिलहाल वह बिहार विधासभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी संभाल रहे हैं।

हाल ही में संपन्न हुआ का विधानसभा चुनाव राजद ने तेजस्वी यादव के चेहरे पर लड़ा था, लेकिन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद से ही पार्टी में लगातार मंथन चल रहा था। अब तेजस्वी यादव ने पार्टी की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में ले ली है।

Bihar Pre Primary School :बिहार के आंगनबाड़ी केंद्र अब बनेंगे प्री-प्राइमरी स्कूल, हर दिन सुबह में होगी प्रार्थना और योग

बिहार में प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के सभी 1 लाख 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा।


Bihar Pre Primary School: बिहार में प्रारंभिक

शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सभी 1 लाख 15 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों को अब प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। इस संबंध में समाज कल्याण विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर एलान किया गया है। इस पहल का उद्देश्य छोटे बच्चों को प्रारंभसे ही शिक्षा से जोड़ना और पोषण के साथ गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई उपलब्ध कराना है।

समाज कल्याण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में राज्य के लगभग 8400 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी एजुकेशन सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से करीब 28 लाख से अधिक बच्चों को एक साथ पढ़ाई और पोषाहार की सुविधा मिलेगी। विभाग का मानना है कि इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर तरीके से हो सकेगा।

विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना की शुरुआत अगले वित्तीय वर्ष से कर दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों को सिर्फ पोषाहार ही नहीं, बल्कि प्रारंभिक शिक्षा भी एक स्कूल की तरह मिले। जब बच्चे छोटी उम्र से ही पढ़ाई के माहौल में रहेंगे, तो अ उनकी स्कूल में निरंतरता भी बनी रहेगी।

योजना के तहत जिन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्री-प्राइमरी स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा, उन सभी केंद्रों को एक ही रंग-रूप में तैयार किया जाएगा। इससे न सिर्फ केंद्रों की पहचान एक जैसी होगी, बल्कि बच्चों को भी स्कूल जैसा वातावरण महसूस होगा। इसके साथ ही बच्चों के खेलने के लिए अलग से जगह चिन्हित की जाएगी और खेल-कूद का समय भी निर्धारित किया जाएगा, ताकि पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक गतिविधियों पर भी ध्यान दिया जा सके।

आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों के लिए एक समान पोशाक की भी व्यवस्था की जाएगी। यह पोशाक जीविका दीदियों के माध्यम से तैयार कराई जाएगी और सभी बच्चों को एक जैसी ड्रेस पहनकर केंद्र पर आना होगा। इससे बच्चों में समानता की भावना विकसित होगी, जैसा अनुशासन भी बनेगा।

इसके अलावा समाज कल्याण विभाग की ओर से बच्चों को पढ़ाई के लिए विशेष किट उपलब्ध कराई जाएगी। इस किट में प्री-प्राइमरी स्तर की पूरी शैक्षणिक सामग्री मुफ्त दी जाएगी, ताकि बच्चों को पढ़ाई में किसी प्रकार की परेशानी न हो। किताबें, कॉपी, रंग, पेंसिल जैसी जरूरी सामग्री इस किट में शामिल होंगी।

जब आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह प्री-प्राइमरी ग्रुप में विकसित हो जाएंगे, तब यहां बच्चों की दिनचर्या भी स्कूल की तरह तय होगी। प्रतिदिन सुबह बच्चों के लिए योग, प्रार्थना और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इससे बच्चों में अनुशासन, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का विकास होगा।

समाज कल्याण विभाग का मानना है कि इस योजना के जरिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों का भरोसा और मजबूत होगा। विभाग का लक्ष्य है कि अभिभावक यह समझें कि आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषाहार का स्थान नहीं, बल्कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाला शिक्षण केंद्र बन चुका है, जहां पढ़ाई और पोषण दोनों एक साथ मिलेंगे।


मुजफ्फरपुर के गायघाट प्रखंड की 19 पंचायत बने गृह-मुक्त प्रसव का माडल


मुजफ्फरपुर जिले का गायघाट प्रखंड गृह-मुक्त प्रसव का एक सफल माडल बन गया है। यहां सभी 19 पंचायतों में गृह प्रसव दर 40 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत पर आ गई है। इस सफलता को देखते हुए, इस माडल को जिले के अन्य प्रखंडों में भी लागू करने की तैयारी है। संस्थागत प्रसव दर 95 प्रतिशत से अधिक होने के कारण मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।

MantoshTalks मुजफ्फरपुर । जिले का गायघाट प्रखंड गृह-मुक्त प्रसव का सफल माडल बन गया है। यहां के सभी 19 पंचायतों में गृह प्रसव दर, जो पहले 40 प्रतिशत से अधिक थी, घटकर मात्र 2 प्रतिशत पर आ गई है।

इस उपलब्धि को देखते हुए अब इस माडल को जिले के अन्य प्रखंडों में भी लागू करने की तैयारी की जा रही है। पीएचसी प्रभारी, आशा तथा एएनएम को इस माडल को अपनाने और बेहतर तरीके से लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक रेहान अशरफ ने बताया कि गायघाट प्रखंड के 19 पंचायत पूरी तरह से गृह-मुक्त प्रसव पंचायत के रूप में शामिल कर लिया गया है।

यहां संस्थागत प्रसव दर 95 प्रतिशत से 3 पहुंच चुकी है, जिसके कारण मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। लक्ष्य है कि इसी माडल को शेष पंचायतों और अन्य प्रखंडों में भी प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि हर गर्भवती महिला को सुरक्षित और सम्मानजनक प्रसव का अवसर मिल सके।
एएनएम और सीएचओ के कार्यों की सघन निगरानी की गई। सभी एएनसी विजिट की शत-प्रतिशत ट्रैकिंग सुनिश्चित की गई।

फ्रंटलाइन वर्करों ने प्रसूताओं के साथ लगातार फोन पर संपर्क बनाए रखा, जिससे उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सका। गायघाट के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि प्रसूताओं को समय पर अस्पताल लाने के लिए परिवहन संबंधी भय को दूर किया गया। एम्बुलेंस सेवाओं को 24 घंटे सातों दिन उपलब्ध और जवाबदेह बनाया गया, जिससे बड़ा बदलाव देखने को मिला।

= इस रणनीति से मिली सफलता

  24 घंटे एम्बुलेंस उपलब्धता सुनिश्चित

•  परिवहन संबंधी डर दूर करने के लिए जवाबदेह एम्बुलेंस सेवा

 • आशा, पर्यवेक्षक, पीएचसी प्रभारी और प्रसव कक्ष प्रभारी के बीच बेहतर समन्वय

•  संभावित प्रसव तिथि से पहले आशा का परिवार से नियमित संपर्क

  अस्पताल में प्रसव के दौरान प्रसूता को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसकी सतत निगरानी

आँकड़ों में छुपा दर्द: भारत की मानसिक स्वास्थ्य सच्चाई

आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य: पूरी जानकारी (Full Data Explanation)

📌 आत्महत्या क्या है?
जब कोई व्यक्ति मानसिक, आर्थिक या सामाजिक दबाव के कारण अपना जीवन समाप्त कर लेता है, तो उसे आत्महत्या कहा जाता है। यह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि गंभीर सामाजिक समस्या है।

📊 भारत में आत्महत्या के आँकड़े

🔹 वार्षिक डेटा (NCRB के अनुसार)
भारत में हर साल लगभग 1.6 से 1.8 लाख आत्महत्याएँ होती हैं

औसतन हर दिन 450+ लोग आत्महत्या करते हैं
प्रति घंटे लगभग 18–20 मौतें

🔹 आत्महत्या दर

लगभग 12–13 प्रति 1 लाख जनसंख्या

➡️ यह दर्शाता है कि समस्या बहुत गहरी और व्यापक है।

👥 सबसे अधिक प्रभावित वर्ग

1️⃣ दैनिक मज़दूर और कम आय वर्ग
आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा
कारण:
कम आमदनी
महँगाई
बेरोज़गारी
कर्ज

2️⃣ किसान
खेती में नुकसान
फसल खराब होना
साहूकार और बैंक कर्ज
प्राकृतिक आपदाएँ

3️⃣ युवा (18–35 वर्ष)
परीक्षा दबाव
बेरोज़गारी
करियर असुरक्षा
सोशल मीडिया तुलना (Comparison Stress)

4️⃣ गृहिणियाँ
घरेलू हिंसा
आर्थिक निर्भरता
भावनात्मक अकेलापन

🧠 मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति

🔹 भारत में अनुमानित:

हर 7 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहा है

अवसाद (Depression) और चिंता (Anxiety) सबसे आम हैं

🔹 लेकिन:

मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात नहीं की जाती

इलाज को आज भी “कमज़ोरी” समझा जाता है

❗ आत्महत्या के प्रमुख कारण

🔴 1. आर्थिक कारण
बेरोज़गारी
कम वेतन
कर्ज़
पारिवारिक खर्च

🔴 2. सामाजिक कारण
पारिवारिक कलह
तलाक
सामाजिक दबाव
बदनामी का डर

🔴 3. शैक्षणिक कारण
परीक्षा में असफलता
प्रतियोगिता का दबाव
कोचिंग कल्चर

🔴 4. मानसिक कारण
अवसाद
अकेलापन
नशे की लत
नींद की कमी

📍 शहरी बनाम ग्रामीण स्थिति
 क्षेत्र             स्थिति
 ग्रामीण.        आर्थिक तंगी, किसान आत्महत्या
शहरी.           नौकरी तनाव, रिलेशनशिप,         .                  अकेलापन

➡️ दोनों जगह कारण अलग, लेकिन तनाव समान।

🚨 चेतावनी संकेत (Warning Signs)

लगातार उदासी
अकेले रहना
नींद या भूख में बदलाव
“मैं बेकार हूँ” जैसे वाक्य
भविष्य को लेकर निराशा

👉 इन संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें

🛡️ समाधान और रोकथाम

व्यक्तिगत स्तर पर
खुलकर बात करना
मदद माँगने में शर्म न करें
योग, ध्यान, नियमित नींद

परिवार और समाज
सुनने की आदत
तुलना बंद करें
भावनात्मक सहयोग

✅ सरकारी और संस्थागत उपाय
टेली-मानस हेल्पलाइन
मुफ्त काउंसलिंग
रोजगार और कौशल विकास योजनाएँ

✍️ निष्कर्ष

👉 आत्महत्या केवल व्यक्ति की नहीं, पूरे समाज की असफलता है।
👉 समस्या का समाधान संवेदनशीलता, रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और सहयोग से ही संभव है।

🌾 PM Kisan Yojana 2025: किसानों के लिए बड़ी अपडेट, रजिस्ट्रेशन और ₹6000 की पूरी जानकारी


भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) वर्ष 2025 में किसानों के लिए और भी महत्वपूर्ण हो गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल ₹6000 की आर्थिक सहायता दी जाती है।
लेकिन 2025 में कुछ नए नियम और अपडेट लागू किए गए हैं, जिनकी जानकारी हर किसान को होना बेहद जरूरी है।

🔷 PM Kisan Yojana क्या है?
PM Kisan Yojana भारत सरकार की एक केंद्रीय योजना है, जिसमें छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
योजना के मुख्य लाभ:
✔ सालाना ₹6000 की सहायता
✔ ₹2000 की 3 किस्तें
✔ पैसा सीधे बैंक खाते में (DBT)
✔ केंद्र सरकार द्वारा 100% फंडिंग

🆕 PM Kisan Yojana 2025 की नई अपडेट
2025 से सरकार ने Farmer ID (किसान पहचान संख्या) को अनिवार्य कर दिया है।

🔴 बिना Farmer ID:
❌ PM Kisan की किस्त रुक सकती है
❌ नई रजिस्ट्रेशन नहीं होगी

जरूरी शर्तें (2025):
Farmer ID अनिवार्य
e-KYC पूरा होना चाहिए
आधार कार्ड बैंक खाते से लिंक
भूमि रिकॉर्ड सही होना चाहिए

🧑‍🌾 Farmer ID क्या है और क्यों जरूरी है?

Farmer ID एक डिजिटल पहचान है, जो किसान की:
भूमि जानकारी
आधार विवरण
सरकारी योजनाओं की पात्रता
को एक जगह जोड़ती है।

📌 सरकार का उद्देश्य:
फर्जी लाभार्थियों को हटाना
सही किसानों तक लाभ पहुँचाना
सभी कृषि योजनाओं को एक सिस्टम से जोड़ना

📝 PM Kisan Yojana 2025 में रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

1️⃣ ऑनलाइन तरीका:
PM Kisan की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
“New Farmer Registration” पर क्लिक करें
आधार नंबर और विवरण भरें

2️⃣ ऑफलाइन तरीका:
CSC (जन सेवा केंद्र)
पंचायत / प्रखंड कार्यालय
किसान पंजीकरण शिविर


💰 PM Kisan 2025 की किस्त (Installment)

विवरण
जानकारी

सालाना राशि
₹6000
किस्तों की संख्या
3
एक किस्त
₹2000
भुगतान तरीका
DBT
📅 2025 में अगली किस्त
यदि Farmer ID और e-KYC पूरा है, तो किस्त समय पर खाते में आएगी।

⚠️ किन कारणों से किस्त रुक सकती है?
❌ e-KYC पूरा नहीं
❌ Farmer ID नहीं बना
❌ बैंक खाता आधार से लिंक नहीं
❌ भूमि रिकॉर्ड में गलती

👉 इसलिए समय रहते अपनी जानकारी अपडेट करें।


📌 PM Kisan Yojana 2025 – किसानों के लिए क्यों जरूरी?

महंगाई के समय आर्थिक सहारा
बीज, खाद, दवा खरीदने में मदद
छोटे किसानों को आत्मनिर्भर बनाना
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती

🔷 VB-G RAM G क्या है?VB-G RAM G का पूरा नाम माना जाता है:Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin)

👉 विकसित भारत ग्रामीण रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन
यह एक ग्रामीण रोज़गार योजना / ढांचा है, जिसे MGNREGA (मनरेगा) के नए रूप या विकल्प के तौर पर चर्चा / प्रस्ताव में रखा गया है।
🔶 योजना का मुख्य उद्देश्य
इस योजना का मकसद है:
ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार की गारंटी
गाँवों में स्थायी संपत्ति (assets) बनाना
लोगों की आजीविका (livelihood) मजबूत करना
विकसित भारत के लक्ष्य को गाँवों तक पहुँचाना
🔷 VB-G RAM G के मुख्य बिंदु
1️⃣ रोज़गार की गारंटी
हर ग्रामीण परिवार को
👉 लगभग 125 दिन तक काम देने का लक्ष्य
काम गाँव के आसपास ही मिलेगा

2️⃣ काम के प्रमुख क्षेत्र
इस योजना के तहत काम मुख्यतः इन क्षेत्रों में होगा:
💧 जल संरक्षण (तालाब, नहर, जल-संरचना)
🛣️ ग्रामीण बुनियादी ढाँचा (सड़क, नाली, पंचायत भवन)
🌾 आजीविका से जुड़े काम (खेती से जुड़े संसाधन)
🌱 जलवायु अनुकूल काम (पेड़, मिट्टी संरक्षण)

3️⃣ खेती के मौसम में छूट
बुआई और कटाई के समय
👉 लगभग 60 दिन का ब्रेक हो सकता है
ताकि किसान खेती पर ध्यान दे सकें

4️⃣ भुगतान प्रणाली
मजदूरी सीधे बैंक खाते में
भुगतान साप्ताहिक या 15 दिन के अंदर

5️⃣ केंद्र–राज्य की भागीदारी
पहले मनरेगा में पैसा ज़्यादातर केंद्र सरकार देती थी
VB-G RAM G में:
सामान्य राज्य: 60% केंद्र + 40% राज्य
पहाड़ी / पूर्वोत्तर राज्य: 90% केंद्र + 10% राज्य

🔶 MGNREGA और VB-G RAM G में अंतर
बिंदु
मनरेगा (MGNREGA)
VB-G RAM G

काम के दिन
100 दिन
~125 दिन

फंडिंग
ज़्यादातर केंद्र
केंद्र + राज्य

काम का स्वरूप
मांग आधारित
योजना आधारित

खेती का मौसम
कोई ब्रेक नहीं
60 दिन का ब्रेक

फोकस
अस्थायी काम
स्थायी विकास

🔷 सरकार के अनुसार फायदे
✔ ज़्यादा रोज़गार
✔ बेहतर गाँव और ढाँचा
✔ स्थायी संपत्ति
✔ पारदर्शिता (डिजिटल निगरानी)
✔ ग्रामीण आय में बढ़ोतरी

🔴 आलोचना / सवाल
कुछ विशेषज्ञों और विपक्ष का कहना है:
❗ काम की कानूनी गारंटी कमजोर हो सकती है
❗ राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा
❗ पंचायतों की स्वतंत्रता कम हो सकती है

🟢 आसान शब्दों में निष्कर्ष
VB-G RAM G का लक्ष्य है
👉 गाँव में काम + आजीविका + विकास

यह योजना मनरेगा से आगे बढ़कर
गाँवों को विकसित भारत से जोड़ने की कोशिश मानी जाती है,
लेकिन इसके ज़मीनी असर पर बहस जारी है।

Wealth Building

जब कोई व्यक्ति Saving से Investing की ओर पहला कदम बढ़ा लेता है,
तो अगला और सबसे ज़रूरी कदम होता है — Consistency और Strategy।
निवेश एक बार का फैसला नहीं है,
यह एक लंबी प्रक्रिया है।

Step 1: Clear Goal बनाइए
सबसे पहले तय करें:
निवेश क्यों करना है?
बच्चों की पढ़ाई
घर
रिटायरमेंट
फाइनेंशियल फ्रीडम
Goal साफ होगा, तो रास्ता आसान होगा।

Step 2: SIP से शुरुआत करें
बड़े पैसे की जरूरत नहीं।
छोटी राशि
हर महीने
लंबी अवधि
SIP नए निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित शुरुआत मानी जाती है।

Step 3: Risk को समझें
हर निवेश में जोखिम होता है,
लेकिन सही जानकारी से जोखिम कंट्रोल किया जा सकता है।
Short-term पैसा = Low risk
Long-term पैसा = Growth-focused investment

Step 4: Patience रखें
मार्केट ऊपर-नीचे होगा,
लेकिन धैर्य रखने वाला निवेशक ही जीतता है
जल्दी अमीर बनने की सोच
अक्सर नुकसान देती है।

Step 5: Review और Learning
हर 6–12 महीने में:
निवेश की समीक्षा
नई जानकारी सीखना
गलतियों से सुधार
निवेशक वही बढ़ता है
जो सीखना नहीं छोड़ता।

🔑 Final Thought
Saving से सुरक्षा मिलती है,
Investing से भविष्य बनता है,
और Consistency से Wealth बनती है।

From Saving to Investing: पैसों को आगे बढ़ाने की कहानी

Just start now 

हर इंसान की आर्थिक यात्रा बचत (Saving) से शुरू होती है।

घर में गुल्लक, बैंक अकाउंट और थोड़ी-थोड़ी जमा राशि — यही हमारी पहली सीख होती है।

लेकिन समय के साथ एक सवाल ज़रूर आता है:

क्या सिर्फ बचत करना ही काफी है?

महँगाई धीरे-धीरे हमारी बचत की ताकत को कम कर देती है।

यहीं से निवेश (Investment) की ज़रूरत समझ में आती है।

इस तस्वीर में एक तरफ गुल्लक है — जो सुरक्षा का प्रतीक है,

और दूसरी तरफ बढ़ता हुआ ग्राफ और सिक्के — जो विकास और अवसर को दर्शाते हैं।

यह बदलाव अचानक नहीं होता, बल्कि सीखने, समझने और धैर्य रखने से आता है।

निवेश का मतलब बड़ा जोखिम लेना नहीं है।


निवेश का मतलब है —

सही जानकारी

छोटे लेकिन नियमित कदम

और लंबी अवधि का सोच

जब बचत निवेश में बदलती है,


तो पैसा सिर्फ सुरक्षित नहीं रहता —

वह काम करने लगता है।

यही बदलाव एक आम इंसान को

My first investment 
   At current time 
    About 6 lacks 

आर्थिक रूप से मज़बूत और आत्मनिर्भर बनाता है।


🔑 Key Message

Saving protects money.Investing grows money.

“ना सीमेंट, ना ईंट,फिर भी सबसे खूबसूरत घर—

बचपन की उँगलियों से मोड़ा गया काग़ज़,
जिसमें छुपी थी दुनिया भर की खुशी।
वो घर छोटा था, नाज़ुक था,
पर उसमें सपनों की छत ऊँची थी।
आज पक्के मकान हैं,
पर दिल अब भी उसी
काग़ज़ के घर में रहता है।” ❤️

📈 मेरी निवेश यात्रा – एक साधारण शुरुआत

मेरी निवेश यात्रा बहुत साधारण सोच से शुरू हुई — कमाना ही काफी नहीं, बचाना और बढ़ाना भी ज़रूरी है। शुरुआत में मैंने सिर्फ सेविंग अकाउंट और छोटी-छोटी बचत पर भरोसा किया। लेकिन समय के साथ समझ आया कि महँगाई के दौर में पैसा तभी टिकता है जब वह काम करता रहे

धीरे-धीरे मैंने निवेश के बारे में सीखना शुरू किया — जैसे SIP, म्यूचुअल फंड, शेयर मार्केट और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट। शुरुआत में डर भी था, गलतियाँ भी हुईं, लेकिन हर अनुभव ने मुझे और समझदार बनाया।

मैंने सीखा कि निवेश कोई जुआ नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और सही जानकारी का खेल है। आज मेरा लक्ष्य जल्दी अमीर बनना नहीं, बल्कि सुरक्षित भविष्य और वित्तीय आज़ादी पाना है।
मेरी यह कहानी उन सभी लोगों के लिए है जो छोटे कदमों से बड़ी मंज़िल तक पहुँचना चाहते हैं।

🌟 अनेकता यादव: साधारण पृष्ठभूमि से वैज्ञानिक बनने तक का असाधारण सफर

अनेकता यादव की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। एक साधारण परिवार में जन्मी अनेकता ने बचपन से ही पढ़ाई को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाया। जहाँ हालात कठिन थे, वहीं उनके इरादे उससे कहीं ज़्यादा मजबूत।
📚 शिक्षा से सपनों तक
अनेकता को विज्ञान में शुरू से ही गहरी रुचि थी। किताबें उनके लिए केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की सीढ़ियाँ थीं। लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की। कई बार असफलताएँ आईं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय हर असफलता को सीख में बदला।
🔬 वैज्ञानिक बनने का सफर
कड़ी मेहनत और लगन के कारण अनेकता यादव ने वैज्ञानिक के रूप में अपनी पहचान बनाई। पुरुष-प्रधान माने जाने वाले विज्ञान क्षेत्र में उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत का कोई जेंडर नहीं होता। उनके शोध, सोच और समर्पण ने उन्हें एक सम्मानित वैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया।
🚺 महिलाओं के लिए प्रेरणा
अनेकता यादव सिर्फ एक वैज्ञानिक नहीं हैं, बल्कि वे उन बेटियों की आवाज़ हैं जो सपने देखती हैं, लेकिन समाज की सीमाओं से डरती हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि
“अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात खुद रास्ता बना देते हैं।”
निष्कर्ष
अनेकता यादव की कहानी हमें सिखाती है कि सपने वही सच होते हैं, जिनके लिए हम मेहनत करना नहीं छोड़ते। आज वे देश के युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए एक प्रेरणास्रोत हैं।

Story of Real GAYGHAT (Facebook Page)

Real गायघाट एक स्थानीय Facebook पेज है जो गायघाट (Muzaffarpur, बिहार) की सचाई, समस्याओं और ज़रूरी जानकारी को लोगों तक पहुँचाने के लिए बनाया गया है।
यह पेज उन तथ्यों और खबरों को साझा करता है जो अक्सर आम लोगों तक नहीं पहुँच पाते—चाहे वह सरकारी योजनाओं की जानकारी हो, स्थानीय सेवाओं की अपडेट हो या समुदाय के मुद्दों का सच। �Real गायघाट
Facebook
यह पेज लाखों लोगों नहीं, बल्कि स्थानीय जनता के लिए काम करता है — जहाँ रोज़मर्रा की समस्यों, सरकारी योजनाओं, रोजगार, बैंक/सुविधाओं और खबरों जैसी जानकारी पोस्ट होती है।
उदाहरण के लिए, यहाँ बैंक सेवाओं की जानकारी जैसे “GAYGHAT All Bank Branches – Public Service” जैसी उपयोगी पोस्ट भी शेयर होती हैं। �
Facebook
यह फेसबुक पेज एक समुदाय की आवाज़ बन चुका है — जहाँ हर पोस्ट का उद्देश्य है सही जानकारी समय पर पहुँचाना, ताकि गायघाट के लोग अपडेट रहें और अपने अधिकारों तथा सेवाओं के बारे में जागरूक बनें। �MantoshTalks

📈 मेरी Investment और Financial Journey

Mantosh Kumar Yadav
मेरी financial journey किसी बड़े पैकेज या विरासत से शुरू नहीं हुई।
यह शुरू हुई जिज्ञासा, गलतियों और सीखने की इच्छा से।
शुरुआत में पैसे का मतलब सिर्फ़ खर्च और ज़रूरतें थीं।
Savings तो होती थी, लेकिन पैसा कैसे काम करता है, यह समझ नहीं थी।
धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ —
👉 पैसा कमाने से ज़्यादा ज़रूरी है, उसे सही जगह लगाना।
🔹 पहला कदम: Awareness
मैंने सबसे पहले खुद को educate किया
Investment क्या होती है
Risk और Return का मतलब
Long-term सोच क्यों ज़रूरी है
यहीं से मेरी सोच बदली।
🔹 दूसरा कदम: छोटे लेकिन नियमित निवेश
मैंने बड़े risk नहीं लिए।
छोटे-छोटे amount से शुरुआत की —
Consistency > Quantity
यह मेरा पहला financial rule बना।
गलतियाँ भी हुईं,
कभी impatience, कभी fear,
लेकिन हर loss ने मुझे अनुभव में profit दिया।
🔹 तीसरा कदम: Discipline और Patience
मैंने सीखा कि
📌 Market रोज़ ऊपर-नीचे होता है,
लेकिन discipline long-term में जीतता है।
मैंने जल्द अमीर बनने की बजाय
स्थिर और सुरक्षित growth को चुना।
🔹 आज की स्थिति
आज मेरी investment journey सिर्फ़ पैसे तक सीमित नहीं है।
यह है —
Financial clarity
Decision लेने की confidence
और future को लेकर fear नहीं, plan
मैं अब investment को gamble नहीं, system मानता हूँ।
मेरी सीख
अगर आप भी शुरुआत करना चाहते हैं, तो याद रखें:
“Perfect time नहीं आता,
लेकिन सही सोच से शुरुआत ज़रूर होती है।”
यह सिर्फ़ मेरी कहानी नहीं,
यह हर उस इंसान की कहानी है
जो financially independent बनना चाहता है।

🟢 गायघाट में जनता दरबार: विधायक से आम जनता का सीधा संवाद

✍️ रिपोर्ट: Mantosh Kumar Yadav | Gayghat
गायघाट प्रखंड में आज जनता दरबार का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया। इस जनता दरबार में माननीय विधायक स्वयं उपस्थित रहे और आम जनता की समस्याओं को सीधे सुना।
जनता दरबार का मुख्य उद्देश्य था —
जनता और जनप्रतिनिधि के बीच सीधा संवाद स्थापित करना।
🔍 जनता ने उठाए ये प्रमुख मुद्दे
जनता दरबार में लोगों ने खुलकर अपनी समस्याएँ रखीं, जिनमें मुख्य रूप से:
खराब सड़क और अधूरी नालियों की समस्या
बिजली आपूर्ति में अनियमितता
राशन कार्ड और पीडीएस से जुड़ी शिकायतें
सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना
स्वास्थ्य केंद्र और दवा की कमी
शिक्षा व्यवस्था में लापरवाही
कई ग्रामीणों ने कहा कि वे लंबे समय से इन समस्याओं को लेकर कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन समाधान नहीं मिल पा रहा था।
🗣️ विधायक का जवाब और आश्वासन
माननीय विधायक ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा:

जनता दरबार लोकतंत्र की असली ताकत है।
जनता की समस्या मेरी प्राथमिकता है।”

विधायक ने भरोसा दिलाया कि जिन मामलों का समाधान तुरंत संभव है, उन्हें जल्द पूरा किया जाएगा और शेष समस्याओं को तय समय सीमा में निपटाया जाएगा।
🏛️ जनता दरबार क्यों ज़रूरी?
जनता दरबार सिर्फ शिकायत मंच नहीं है, बल्कि:
जवाबदेही तय करने का माध्यम
जनता की आवाज़ को मंच देने का तरीका
शासन और जनता के बीच भरोसा बढ़ाने की प्रक्रिया
📌 स्थानीय जनता की प्रतिक्रिया
जनता दरबार में आए लोगों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि इस तरह के आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए, ताकि आम आदमी की बात सीधे सुनी जा सके।
निष्कर्ष
गायघाट में आयोजित जनता दरबार ने यह साबित कर दिया कि जब जनप्रतिनिधि सीधे जनता से संवाद करते हैं, तो समस्याओं के समाधान की राह आसान हो जाती है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि उठाए गए मुद्दों पर ज़मीनी स्तर पर कितना काम होता है

गायघाट में किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रही?

ज़मीनी हकीकत बनाम सरकारी दावे
प्रस्तावना
गायघाट प्रखंड के किसान इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। खेत तैयार हैं, बीज बोने का समय आ चुका है, लेकिन सबसे ज़रूरी चीज़—खाद (यूरिया, डीएपी, पोटाश)—उन्हें समय पर नहीं मिल पा रही। सवाल यह है कि जब सरकार हर साल पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने का दावा करती है, तो गायघाट में किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रही?
1️⃣ खाद की मांग ज़्यादा, आपूर्ति कम
खरीफ और रबी सीजन के समय गायघाट में खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है।
लेकिन स्थानीय सहकारी समितियों और निजी दुकानों पर:
सीमित मात्रा में खाद पहुँचती है
समय पर स्टॉक नहीं आता
किसानों की संख्या के अनुसार वितरण नहीं होता
👉 नतीजा: किसान लाइन में लगते हैं, लेकिन हाथ खाली लौटते हैं।
2️⃣ कालाबाज़ारी और जमाखोरी
स्थानीय किसानों का आरोप है कि:
खाद को ब्लैक में बेचा जा रहा है
एक बोरी की कीमत तय रेट से ₹300–₹500 ज़्यादा ली जा रही है
छोटे किसानों को खाद नहीं मिलती, बड़े किसानों को पहले
📌 प्रशासनिक निगरानी की कमी यहाँ साफ दिखती है।
3️⃣ ऑनलाइन पंजीकरण की समस्या
सरकार ने खाद वितरण के लिए ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है, लेकिन:
कई किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं
इंटरनेट की समस्या
तकनीकी जानकारी का अभाव
👉 इसका सीधा असर बुज़ुर्ग और गरीब किसानों पर पड़ रहा है।
4️⃣ समय पर मॉनिटरिंग का अभाव
कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा:
समय-समय पर दुकानों की जांच नहीं
स्टॉक की सही रिपोर्टिंग नहीं
शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई नहीं
❗ यही वजह है कि समस्या हर साल दोहराई जाती है।
5️⃣ किसान क्या कहते हैं? (ज़मीनी आवाज़)
“खेत तैयार है, पैसा भी है, लेकिन खाद नहीं मिल रहा।”
“सरकारी रेट पर खाद सिर्फ कागज़ में है।”
“लाइन में खड़े रहो, फिर भी खाद नहीं।”
ये आवाज़ें गायघाट के कई गांवों से लगातार सामने आ रही हैं।
6️⃣ सरकार के दावे और हकीकत
सरकारी आंकड़ों में:
खाद की कोई कमी नहीं
वितरण सुचारू बताया जाता है
लेकिन ज़मीनी सच्चाई:
किसान परेशान
फसल लेट
लागत बढ़ रही है
समाधान क्या हो सकता है?

✔ खाद की आपूर्ति समय से पहले सुनिश्चित की जाए
✔ कालाबाज़ारी पर सख्त कार्रवाई
✔ ऑफलाइन विकल्प भी उपलब्ध हों
✔ स्थानीय स्तर पर पारदर्शी वितरण सूची
✔ किसानों की शिकायत के लिए हेल्पलाइन
निष्कर्ष
गायघाट में खाद संकट सिर्फ सप्लाई का नहीं, प्रशासनिक व्यवस्था की कमजोरी का भी सवाल है। जब तक ज़मीनी हकीकत को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा, तब तक किसान इसी तरह परेशान होते रहेंगे।
✍️ आपका क्या कहना है?
क्या आपके गांव में भी खाद की समस्या है?
नीचे कमेंट करें और अपनी बात रखें।

🌱 एक शुरुआती नेता की राजनीतिक यात्रा

🌱 एक शुरुआती नेता की राजनीतिक यात्रा
हर राजनीतिक करियर की शुरुआत पद से नहीं, बल्कि जनता से होती है।
एक युवा सबसे पहले अपने आसपास की समस्याओं को देखता है—
टूटी सड़कें, बेरोज़गार युवा, किसानों की परेशानी, स्कूलों की कमी।
शुरुआत में वह सिर्फ़ सुनता है, समझता है और सवाल पूछता है।
🧩 चरण 1: जागरूकता
वह समझता है कि राजनीति सत्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।
गाँव की बैठकों, छात्र संघ, सामाजिक कार्यक्रमों में भाग लेता है।
धीरे-धीरे लोग उसकी सोच और ईमानदारी को पहचानने लगते हैं।
🤝 चरण 2: समाज सेवा
चुनाव से पहले सेवा आती है।
बाढ़ में मदद, युवाओं को मार्गदर्शन, स्थानीय मुद्दे उठाना—
यही विश्वास की नींव बनता है।
📣 चरण 3: जनता की आवाज़
वह बोलना शुरू करता है—
प्रशासन से मिलकर, आवेदन देकर, सोशल मीडिया के माध्यम से।
आलोचना से डरता नहीं, बल्कि सीखता है।
🗳️ चरण 4: राजनीति में प्रवेश
वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ता है या स्थानीय समूह बनाता है।
शुरुआत में भूमिका छोटी होती है—
बूथ कार्यकर्ता, युवा मोर्चा, स्वयंसेवक।
हर बड़ा नेता यहीं से आगे बढ़ा है।
🧠 चरण 5: सीख और अनुशासन
राजनीति धैर्य सिखाती है।
हार, गलती और संघर्ष—सब अनुभव बन जाते हैं।
वह विचारधारा, कानून और जन व्यवहार को समझता है।
🏆 चरण 6: नेतृत्व
समय के साथ ईमानदारी और निरंतरता समर्थन में बदल जाती है।
अब लोग पूछते नहीं—
“आप कौन हैं?”
बल्कि कहते हैं—
“आप हमारी आवाज़ हैं।”

आज की सच्ची कहानी: मेहनत बनाम सिस्टमआज गाँव से शहर तक एक ही सवाल गूंज रहा है—

“मेहनत करने वाले को उसका हक कब मिलेगा?”
किसान खेत में पसीना बहा रहा है,
युवा नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है,
छोटा व्यापारी महँगाई से जूझ रहा है।
सरकारी योजनाएँ काग़ज़ों में चमकती हैं,
लेकिन ज़मीन पर पहुँचते-पहुँचते
उम्मीदें थक जाती हैं।
👉 सवाल सिर्फ़ योजनाओं का नहीं,
जवाबदेही (Accountability) का है।
जब तक जवाब तय नहीं होगा,
तब तक हालात नहीं बदलेंगे।
आज की कहानी यही कहती है—
आवाज़ उठाइए, सवाल पूछिए,
क्योंकि चुप्पी सबसे बड़ा अपराध है।

गायघाट की CO शिवांगी पाठक ने किया सम्मानित संवाद

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